Meri nazar mujhe ko deewana



 इश्क जब हद से पार हो जाएगा

जिंदगी बेकार हो जाएगा 

   किसी के साथ ना कभी ऐसा हो ये रब 

अब किसी के प्यार को किसी से प्यार हो जाएगा।


कोई आस नहीं एहसास नहीं

दरिया भी मिला बुझी प्यास नहीं।


तुमको पाया बड़ी मुश्किल से न खोने दूंगा

मैं किसी और का तुम्हें नहीं होने दूंगा।



भारी महफ़िल में दिल हसता है,

तनहाई में रोटा है

किसको याद करना भी बड़ा दुष्वार होता है।


आशिकी का दिया जब से रोशन किया

दर्द सारे जमाने का दिल में लिया।


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चाँद लमहाओं की मुलाकात मुलाकात है क्या

तुझे माल नहीं तारों भरी रात है क्या

इतनी जल्दी तू मोहब्बत का सब भूल गया

ऐसी वैसी नहीं कुछ बात तो फिर बात है क्या।


घाटा पे झूमता बदल नहीं तो कुछ भी नहीं

तुम्हारी आंखों में काजल नहीं तो कुछ भी नहीं।


दिल की तबाहियों का अफसाना कह रही है

मेरी नज़र मुझे को दीवाना कह रही है।


क्या शहर नामुराद की इज्जत करेगा कौन

अरे हम ही चले गए तो मोहब्बत करेगा कौन

क्या घर की देखभाल को विरानियां तो हूं

जाले हटा दिए तो हिफाजत करेगा कौन।


हमारे हमारे इश्क का इजहार यूं किया

फूलों से तेरा नाम पत्थरों पे लिख दिया ।


सो गई हर गली सो गया ये सहर

अपने हलत से हर कोई बेखबर।


बहकी हुई बहार ने पीना सीखा दिया

बदमाश बरगो बार ने पीना सीखा दिया

पीटा हू इस गराज से जीना है चार दिन

मरने के इंतजार ने पीना सीखा दिया।


अपने मतलब के शिव करते नहीं ये बल्ले

नपते है पैसे से ये यार के हाल।


कोई दिल से बुरा नहीं होता, नहीं होता

वक्त जो बेवफा नहीं होता

उसे हलत बुरे होते हैं

आदमी खुद बुरा नहीं होता।


खिछें खिचें हुए रहते हो ध्यान किसका है

जरा बताओ तो ये इम्तिहान किसका है

हमें भुला दो मगर ये तो याद ही होगा

नई सड़क पर पुराना मकान किसका है।


क्या किसी और से भी वादा किया है धुन

रह में क्या कोई धनवान मिला था तुझको

क्या मोहब्बत का बदला धुंध लिया है धुन।


यार बिना सब सुना सुना प्यार बिना सब खाली

तुम आ जाते हो तो झूम उठती है डाली डाली।


आंखें ही न रॉय है दिल भी तेरे प्यार में रोया है

हमारे तेरी खातिर अपना चैन सुकून भी खोया है।


तू है मोहब्बत मेरी भी है इबादत मेरी

तू ही मेरा प्यार है, भी ही जरूरत मेरी।


इनके चेहरे पर लगे रहते हैं सौ नकाब

हम भी समझ पाए नहीं खाते हैं या गुलाब।


किसी के इश्क में जब तक कोई रूसा नहीं होता

मोहब्बत का फ़साना तब तलक सच्चा नहीं होता।


तुम किसी अपने को ऐसे बेवफा न समझो

आशिकी में बेबसी को तुम दाग न समझो ।


हमने अपनी हर सांस पर नाम तेरा लिख ​​दिया

एक तुझे पाने की खातिर खुद को पागल कर लिया।


पिछले बरस ये डर था कहीं तू जुदा ना हो

अबके बरस दुआ है, तेरा सामना ना हो समाना ना हो।


अशिको में हुस्नो रंग समोता रहा हूं मैं

आंचल किसका थाम के रोता रहा हूं मैं

निखरा है जाके अब कहीं चेहरा शाहूर का

बरसो इसे शराब से धोता रहा हूं मैं।


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